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Mar
26

Exploring Cinematic Chemistry at the Tuli Research Centre for India Studies’ Grand Exhibition

Exploring Cinematic Chemistry at the Tuli Research Centre for India Studies’ Grand Exhibition Nestled within the halls of the India International Centre in New Delhi, an extraordinary exhibition is captivating the hearts and minds of cultural enthusiasts. The Tuli Research Centre for India Studies presents “Self-Discovery via Rediscovering India,” an immersive vast journey through the rich tapestry of India’s cinematic & cultural heritage.  “Our exhibition celebrates the enduring artistic and cultural bonds forged across nearly two hundred years of India being herself in which one hundred and twenty are revolving around the magic of the silver screen,” says Neville Tuli, encapsulating the context of the showcase. The exhibition can only reveal a glimpse of the vast treasure trove of world cinematic history which Tuli has carefully archived and preserved over thirty years. Among the captivating displays are a rare array of photographs, Jubilee trophies and artworks showcasing the remarkable cinematic chemistry between legendary figures. At the heart of the exhibition lies a fascinating collection spot-lighting director-actor relationships. From the iconic duo of Raj Kapoor and Nargis to the unique bonds between Amitabh Bachchan and a few master directors such as Prakash Mehra, Manmohan Desai and Yash Chopra, to the iconic sizzle between Dharmendra and Hema Malini. Internationally renowned collaborations also take centre-stage, such as the legendary partnerships of Tod Browning and Lon Chaney, Fritz Lang and Thea von Harbou, Joseph von Sternberg and Marlene Dietrich, Martin Scorsese and Robert de Niro, Akira Kurosawa and Toshirō Mifune, among others. Much of these collections will be revealed in depth with the launch of the Research Centre’s website. The Exhibition continues at the India International Centre Gallery and closes on 30th March 2024.        Exploring Cinematic Chemistry at the Tuli Research Centre for India Studies’ Grand...
Mar
26

Raj Kapoor – Nargis, Dev Anand – Waheeda Rehman, Dharmendra – Hema Malini, Their Chemistry And Relationships Of Many Artists Will Be Seen In The Attractive Exhibition Of Tuli Research Center For India Studies

Raj Kapoor – Nargis, Dev Anand – Waheeda Rehman, Dharmendra – Hema Malini, Their Chemistry And Relationships Of Many Artists Will Be Seen In The Attractive Exhibition Of Tuli Research Center For India Studies राज कपूर और नरगिस, देव आनंद और वहीदा रहमान, धर्मेंद्र और हेमा मालिनी, इनकी केमिस्ट्री और कई कलाकारों के रिश्ते नजर आएंगे तुली रिसर्च सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज की आकरशक प्रदर्शनी में… भारत की‌ सांस्कृतिक विरासत में गहरी रूचि रखने वाले लोगों के लिए नई दिल्ली के इंडिया इंटरनैशनल सेंटर गैलेक्सी में चल रही प्रदर्शनी लोगों के दिलो-दिमाग पर ख़ूब असर कर‌ रही है और तमाम लोगों को ख़ूब पसंद आ रही है. द तुली रिसर्च सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज़ की‌ ओर‌ से प्रदर्शित की गई ‘सेल्फ़ डिस्कवरी वाया रीडिस्कवरिंग इंडिया’ नामक यह प्रदर्शनी भारतीय सिनेमा और सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध परंपराओं की अद्भुत झलक पेश करती है. प्रदर्शनी को क्यूरेट और प्रस्तुत करने वाले नेविल तुली ने‌ इस मौके पर‌ कहा, “इस अनोखी प्रदर्शनी भारत के 200 सालों की कला और संस्कृति के‌ अंतर-संबंधों का अक्स देखने‌ को मिलता है. इनमें से तकरीबन 120 सालों का तो भारतीय सिनेमा‌ का गौरवशाली इतिहास ही रहा हैं.” उल्लेखनीय है कि यह प्रदर्शनी नेविल तुली द्वारा पिछले 30 सालों में आरकाइव की गईं और बड़े जतन से सहेजी गईं विश्व की सिनेमाई धरोहर की एक छोटी से झलक मात्र ही पेश करती है. इस प्रदर्शनी में दिग्गजी कलाकारों के बीच की केमिस्ट्री को दर्शाने वाली बेहद आकर्षक तस्वीरें, जुबिली ट्रॉफ़ियां और तमाम तरह के वास्तुशिल्पों को प्रदर्शित किया गया है. इस प्रदर्शनी का सबसे बड़ा आकर्षण है निर्देशकों और कलाकारों के रिश्तों को रेखांकित करने वाली खंड. राज कपूर और नरगिस, प्रकाश मेहरा, मनमोहन देसाई व यश चोपड़ा जैसे महान निर्देशकों के साथ अमिताभ बच्चन के रिश्तों के अलावा धर्मेंद्र और हेमा मालिनी के बीच के रिश्तों को भी बड़े ही कलात्मक ढंग से इस प्रदर्शनी में पेश किया गया है. इस प्रदर्शनी से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली साझेदारियां भी आकर्षण का‌ केंद्र में आ गई हैं, जैसे कि टॉड ब्राउनिंग और लॉन चानेय, फ़्रिट्ज़ लैंग और थिया वोन हारबाऊ, जोसेफ़ वॉन स्टर्नबर्ग और मार्लिन डियाट्रिच, मार्टिन स्कॉर्सिस और रॉबर्ट डे निरो, अकीरा कुरोसावा और तोशिरो मिफ़्यून के बीच हुई  पार्टनरशिप. रिसर्च सेंटर के  वेबसाइट के‌ लॉन्च होते ही इन कलेक्शन्स को विस्तार से लोगों के सामने पेश किया जाएगा. यह प्रदर्शनी इंडिया इंटरनैशनल सेंटर गैलक्सी में 30 मार्च, 2024 तक जारी रहेगी.     राज कपूर और नरगिस, देव आनंद और वहीदा रहमान, धर्मेंद्र और हेमा मालिनी, इनकी केमिस्ट्री और कई कलाकारों के रिश्ते नजर आएंगे तुली रिसर्च सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज की आकरशक प्रदर्शनी में…...
Mar
26

It Feels Good To Work With Narendra Modiji At The Centre And Devendraji In Maharashtra – SM Khan (BJP)

It Feels Good To Work With Narendra Modiji At The Centre And Devendraji In Maharashtra – SM Khan (BJP) केंद्र मे नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र मे देवेंद्र जी के साथ  काम करने मे  अच्छा लगता है- एस एम खान बीजेपी भारतीय जनता पार्टी पूर्व उपाध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा महाराष्ट्र, एसएम खान की लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है जनता का सपोर्ट करना और उनके सुख-दुख में पहुंचना एसएम खान का दिनचर्या हो गया है, वही आए दिन स्थानीय लोगों के लिए कुछ ना कुछ कार्यक्रम करते रहते हैं, शराब घोटाला मे केजरीवाल की हुई गिरफ्तारी पर एसएम खान ने बताया कि अब देश धीरे-धीरे भ्रष्टाचार से मुक्त हो रहा है l आज देश में कानून व्यवस्था इतनी तगड़ी है की हर कोई कानून का पालन करने के लिए मजबूर है जो कानून से खिलवाड़ करेगा उसका घर जेल होगा l उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को एक बार फिर से प्रधानमंत्री चुने जाने के लिए लोगों से अपील किया और कहां कि जब से माननीय नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हुए हैं भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तब से देश काफी तेजी से तरक्की कर रहा है आपको बता दें एसएम खान मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी हैं और मुंबई में उनका जन्म हुआ है l मुंबई के उत्तर भारतीय गुट के बड़े नेता माने जाते हैं एसएम खान ने बताया देश के कोने-कोने में सड़कों का जाल जिस तरह से फ़ैलते जा रहा है यह 10 साल के पहले नहीं हुआ था आपनेभी नहीं देखा होगा आज हर गांव हर मोहल्ला सड़क से जुड़ा है,वहीं कांग्रेस की सरकार के दौरान बरसात के दिनों में अगर गांव में कोई बीमार हो जाता था तो एम्बुलेंस उसके घर तक नहीं आ पाती थी काफी दूर ले जाना पड़ता था क्योंकि ठीक से रास्ता ही गांव तक नहीं जुड़ पाया था l आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सड़कों का जाल बिछा के आम जन  के लिए सुविधा दे दिया है मुंबई और उत्तर प्रदेश को जोड़कर अपनी कर्मभूमि मुंबई में एसएम खान आम लोगों के दिल में अपनी जगह बनाए हुए हैं एसएम खान ने बताया भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द मोदी और महाराष्ट्र के यशश्वी मुख्यमंत्री देवेंद्र जी के मार्गदर्शन राह पर चलकर काम करने में बहुत मजा आ रहा है l  वही महाराष्ट्र के बड़े नेताओं का काफी सपोर्ट मिलता है ऐसे मे एस एम खाने बताया कि इस बार 400 के पार का नारा सिद्ध होकर रहेगा देश में भारतीय जनता पार्टी नया कीर्तिमान बनाएगी जीत का हालांकि इन दिनों देश में लोकसभा का चुनावी माहौल काफी बना हुआ है तमाम राजनीतिक...
Mar
24

MAHADEV KA GORAKHPUR Will Be Released On March 29 In Many Languages Of India And 12 Theaters In America Along With 500 Worldwide Theaters

MAHADEV KA GORAKHPUR Will Be Released On March 29 In Many Languages Of India And 12 Theaters In America Along With 500 Worldwide Theaters ‘महादेव का गोरखपुर’ 29 मार्च को भारत के कई भाषाओं में 500 वर्ल्डवाइड थियेटरों सहित अमेरिका के 12 थियेटर में होगी रिलीज मेगा स्टार रवि किशन भोजपुरी सिनेमा के लिए जब भी कुछ करते हैं तो वह बहुत बड़ा बदलाव  होता है। इसीलिए उन्होंने एक बड़ा स्टेप लिया और भोजपुरी की अबतक सबसे बड़ी फिल्म महादेव का गोरखपुर का निर्माण कर दिया। यह फ़िल्म भोजपुरी फिल्मों के वास्तव में रिफॉर्मेशन का सबसे बड़ा उदाहरण बनती जा रही है। इस फिल्म का ट्रेलर अभी हाल ही में लॉन्च किया गया था, जोकि काफी वायरल हो गया है और हर कोई भूरि भूरि प्रशंसा कर रहा है। इस फिल्म को 29 मार्च को वर्ल्डवाइड रिलीज की जा रही है। इतना ही नहीं इस फ़िल्म भोजपुरी, हिंदी सहित तमाम भाषाओं में फ़िल्म के रिलीज होने का इंतज़ार दर्शक बेसब्री से कर रहे हैं। दर्शक तो दर्शक यहां पर तो बड़ी सेलिब्रिटियों को भी महादेव का गोरखपुर के रीलीजिंग का बेसब्री से इंतज़ार है। एक ऐतिहासिक फिल्म है और यह दर्शकों का खूब मनोरंजन भी करने वाली है। फिल्म का ट्रेलर टाइम्स म्यूजिक भोजपुरी के ऑफिसियल यूट्यूब से रिलीज हुआ है। बता दें कि फिल्म ‘महादेव का गोरखपुर’ का निर्माण वाया फिल्म्स इन असोसिएशन विथ रवि किशन प्रोडक्शंस बैनर के तले किया गया है, जिसके प्रस्तुतकर्ता सी सी शाह एंड संस हैं।  फिल्म के निर्माता प्रीतेश शाह और सलिल संकरन हैं। सह निर्माता अरविंद सिंह और अमरजीत दहिया हैं। निर्देशक राजेश मोहन ने फिल्म का निर्देशन किया है। कहानी साई नारायण ने लिखी है। कार्यकारी निर्माता शंकर नारायणन हैं। फिल्म का म्यूजिक राईट जंगली म्यूजिक के पास है। पहली बार भोजपुरी फ़िल्म जगत से सभी लोगों ने किसी एक फ़िल्म को देखने के लिए मास अपील किया है। यह देखने में आ रहा है कि सबके अंदर इस फ़िल्म को लेकर उतनी ही जिज्ञासा है और देखने की ललक है, जितना कि एक आम दर्शक को होती है। अब सोचिए कि यदि कोई बड़ा स्टार खुद किसी अन्य फ़िल्म की प्रशंसा करे तो दर्शक उसे कैसे इग्नोर कर सकते हैं। बड़े लेबल पर यदि कोई सुपरस्टार किसी दूसरे स्टार की फ़िल्म को देखने की अपील करते हैं तो इसका असर बहुत बड़े स्तर पर पड़ता ही है। गौरतलब है कि रवि किशन के हैरतअंगेज अदाकारी से सजी फ़िल्म ‘महादेव का गोरखपुर’ आगामी 29 मार्च को वर्ल्डवाइड थियेटरों में रिलीज हो रही है। जिसको भारत के कई भाषाओं में लगभग 500 थियेटरों सहित विदेशों में भी रिलीज किया जा रहा है, जिसमें अमेरिका के...
Mar
22

Self Discovery Via Rediscovering India: A Unique Attempt To Understand The Country’s Cultural Heritage Through Indian Cinematic History

Self Discovery Via Rediscovering India: A Unique Attempt To Understand The Country’s Cultural Heritage Through Indian Cinematic History सेल्फ़ डिस्कवरी वाया रिडिस्कवरिंग इंडिया: भारतीय सिनेमाई इतिहास के ज़रिए देश की सांस्कृतिक विरासत को समझने का अनूठा प्रयास ‘द तुली रिसर्च सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज़’ के संस्थापक और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखने में माहिर नेविल तुली का मानना है कि “हर किसी के अंदर मुगल-ए-आज़म का वास है.” उनका यह अद्भुत वाक्य ‘सेल्फ़ डिस्कवरी वाया रीडिस्कवरिंग इंडिया’ नामक प्रदर्शनी देखने के लिए पहुंचे 100 छात्रों के‌ लिए एकदम खरा साबित हुआ. इस प्रदर्शनी का आयोजन 15 से 30 मार्च, 2024 के‌ बीच न‌ई दिल्ली के इंडिया इंटरनैशनल सेंटर गैलैरी में किया जा रहा है. उल्लेखनीय है कि प्रदर्शनी को ‘द तुली रिसर्च सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज़’ द्वारा क्यूरेट किया गया है जो भारत की 100 से भी अधिक की सिनेमाई विरासत को अनोखे अंदाज़ में पेश करती है. गंगा जमुना, पाकीज़ा और मुगल-ए-आज़म’ जैसी कालजयी फ़िल्मों से लेकर देवी, क्रांति और काबुलीवाला जैसे मास्टरपीस के माध्यम से इस प्रदर्शनी में भारतीय सिनेमा के उत्सवी रंगों की अनोखी छटां देखने को मिलेगी. इस प्रदर्शनी के आयोजन का मूल मक़सद भारत की सांस्कृतिक विरासत के नज़रिए से लोगों को ख़ुद की पहचान को तलाशने का मौका देना है. यह नेविल तुली की दूरदृष्टि का ही नतीजा है कि तमाम कलाकृतियों, शिल्पकृतियों, आरकाइव व स्मृति चिह्नों को मूल व डिजिटल स्वरूप में संजोकर इस प्रदर्शनी में पेश किया जा रहा है. यह प्रदर्शनी लोगों को आत्मचिंतन व ज्ञान की खोज करने के मार्ग पर ले जाने का कार्य करेगी. नेविल तुली समझाते हुए कहते हैं, “द तुली रिसर्च सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज़ परंपरा और आधुनिकता के बीच की खाई को पाटने का अहम कार्य करता आ रहा है. अपनी इस पहली प्रदर्शनी के माध्यम से हम भारतीय विरासत की विविधता और वैश्विक पटल पर इसके अद्भुत प्रभाव को पेश करने नायाब कोशिश कर रहे हैं.”   भारतीय और विश्व सिनेमा, फ़ाइन और पॉपुलर आर्ट्स व क्राफ़्ट्स, फ़ोटोग्राफ़ी, वास्तुशिल्प से जुड़ी विरासत, पशु कल्याण, पारिस्थितिकीय शिक्षा और सामाजिक विज्ञान के माध्यम से यह प्रदर्शनी लोगों को भारत की बहुमुखी पहचान से अवगत कराती है. इस प्रदर्शनी के लिए सैंकड़ों शोध सामग्रियों और कलाकृतियों को  करीने से क्यूरेट किया गया है ताकि भारत की उत्सवी संस्कृति के मर्म को लोगों के सामने एक अलहदा अंदाज़ में पेश किया जा सके. इस प्रदर्शनी में 6000 साल में फैली भारतीय सभ्यता की ऊर्जावान झलक दिखाई देगी जिसके ज़रिए लोगों को भूतकाल और वर्तमान काल दोनों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. आंगतुक जैसे इस प्रदर्शनी का अनुभव हासिल करने के लिए यहां...

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